टिम कुक छोड़ेंगे Apple के CEO का पद, 15 साल बाद सितंबर में देंगे इस्तीफा, अब इन्हें मिली कंपनी की कमान
4/21/2026 6:19:37 AM
टेक डेस्क : दिग्गज टेक कंपनी एपल (Apple) में एक बड़े युग का अंत होने जा रहा है। कंपनी के मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक ने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। स्टीव जॉब्स के बाद लगभग 15 वर्षों तक कंपनी की कमान संभालने वाले कुक 1 सितंबर को अपना पद छोड़ देंगे। उनकी जगह कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस को नया सीईओ नियुक्त किया गया है।
जॉन टर्नस संभालेंगे कमान, कुक की रहेगी सीमित भूमिका
65 वर्षीय टिम कुक के नेतृत्व में एपल का बाजार मूल्य अभूतपूर्व तरीके से बढ़ा और आईफोन के दौर में यह 3.6 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। हालांकि, कुक पूरी तरह से कंपनी से अलग नहीं होंगे। वह अमेजन के जेफ बेजोस और नेटफ्लिक्स के रीड हेस्टिंग्स की तर्ज पर कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जुड़े रहेंगे और कंपनी के कामकाज में मार्गदर्शन देते रहेंगे। गौरतलब है कि कुक ने 1990 के दशक में दिवालिया होने की कगार पर खड़ी एपल को दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
भारत में 'एंटीट्रस्ट' मामले में फंसी एपल
एक तरफ जहां कंपनी नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, वहीं भारत में उसे बड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने आईफोन एप मार्केट में दबदबे के गलत इस्तेमाल को लेकर एपल के खिलाफ जांच तेज कर दी है। 21 मई को इस मामले की अंतिम सुनवाई तय की गई है। यदि एपल दोषी पाई जाती है, तो उस पर 38 अरब डॉलर (करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 2021 में तब शुरू हुआ जब कई भारतीय स्टार्टअप्स और मैच ग्रुप ने एपल के कारोबारी तरीकों पर आपत्ति जताई थी। जांच में पाया गया कि एपल डेवलपर्स को अपना 'इन-एप पर्चेज' (IAP) सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करती है, जो बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है।
जांच में देरी करने का आरोप
सीसीआई ने अपने आदेश में कहा है कि एपल अक्टूबर 2024 से जरूरी वित्तीय जानकारियां देने में विफल रही है और उसने दिल्ली हाई कोर्ट में भारत के एंटीट्रस्ट कानूनों को चुनौती देकर जांच में देरी करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एपल अब भी अपने वित्तीय विवरण जमा नहीं करती है, तो जुर्माने की रकम पर उसकी दलीलें बेहद सीमित रह जाएंगी।

