साइबर स्पेस में होगी World War 3
3/10/2016 8:57:40 AM
जालंधर : पिछले साल दिसम्बर में यूक्रेन में पावर ग्रिड अचानक ही रुक गए। किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली परन्तु बाद में पता चला कि पावर ग्रिड पर ऑनलाइन हमला हुआ था और सिस्टम को रिमोटली एक्सैस किया जा रहा था। एक्सपटर्स का मानना था कि इस सबके पीछे रशियन सरकार का हाथ है, जिसका हैडक्वार्टर यूक्रेन से 800 मील दूर है। यह पहली बार है कि किसी पावर ग्रिड पर साइबर अटैक हुआ है।
यह घटना साइबर क्राइम की सिर्फ एक उदाहरण है। पूरी दुनिया में आतंकवादी और सरकारें साइबर अटैक्स को ही पहल दे रही हैं। अमरीका ने भी सार्वजनिक तौर पर इन हमलों को माना है। बीते सोमवार डिपार्टमैंट आफ डिफैंस के सैक्रेटरी ऐश कार्टर ने बताया कि अमरीका आई.एस.आई.एस. (आतंकवादी संगठन) के सिस्टस पर साइबर हमले करने जा रहा है। इन अटैक्स के साथ आई.एस.आई.एस. के नैटवर्क को तोड़ा जाएगा, इसके साथ ही इनके नैटवक्र्स पर इतना ज्यादा लोड डाला जाएगा कि वह काम करना बंद कर देंगे, इससे ज्यादा कार्टर ने और कुछ नहीं बताया। डिपार्टमैंट आफ डिफैंस ने इससे ज्यादा और कुछ बताने से इन्कार कर दिया है।
यूक्रेन पर हुए हमले और कार्टर के बयान के बाद हमारे आगे यह बात तो साफ हो गई है कि साइबर स्पेस में विनाशकारी जंग ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और अब वह समय दूर नहीं जब आम लोगों की जिन्दगी पर भी बहुत बुरा प्रभाव पडऩा शुरू हो जाएगा। साइबर अटैक्स को बुनियादी तौर पर इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ये साइबर स्पेस के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को डैमेज कर सकें, जैसे कि यूक्रेन के पावर ग्रिड पर हुआ।
पिछले साल साइबर अटैक्स द्वारा फैडरल कर्मचारियों की निजी जानकारी यू. एस. सरकार के पर्सनल मैनेजमैंट विभाग में से चोरी की गई थी। इन साइबर अटैक्स ने प्राइवेट कम्पनियों को भी नहीं छोड़ा, कई बार इनके पीछे सरकारी कारण भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए सोनी ने जब उत्तर कोरिया के नेता किम जांग ऊन की एक मजाकिया वीडियो लांच करनी चाही तो इससे कुछ समय पहले ही सोनी के सिस्टम को हैक कर लिया गया था।
डिजीटल वैपन्स की दुनिया में यह सबसे खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। कुछ साल पहले स्टक्सनेट नाम का एक वायरस ईरान के उन कम्प्यूटर्स में पाया गया, जो ईरान के न्यूक्लियर इनरीचमैंट प्रोग्राम को चला रहे थे। बाद में जब पता लगाया गया तो इस वायरस के पीछे अमरीका और इजराईल का हाथ निकला। अब अमरीका का यह कहना है कि जैसे यूक्रेन के पावर ग्रिड्ज पर जो हमला हुआ, वह कहीं अमरीका पर न हो जाए, इसलिए अमरीका अब अपने सबसे बड़े खतरे आई.एस.आई.एस. पर साइबर अटैक करने की तैयारी में है।
दूसरी तरफ आई.एस.आई.एस. भी सोशल मीडिया पर लगातार अमरीका को साइबर अटैक्स की धमकी देता आ रहा है। इससे साफ है कि हर कोई अपने लाभ के लिए साइबर स्पेस का प्रयोग करना चाहता है परन्तु माडर्न वारफेयर की बात करें तो हमारे लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि माडर्न वारफेयर में साइबर अटैक्स न्यूक्लियर वार से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं और हो सकता है कि इसके साथ तीसरे विश्व युद्ध की शुरूआत हो जाए।

